तहसील कार्यालय के बाहर मुख्य मार्ग पर एक से दो फीट तक भरा पानी,व्यापारियों ने जल निकासी व्यवस्था और नालों की सफाई पर उठाए सवाल।
भीम प्रज्ञा न्यूज.मंडावर। मनोज खंडेलवाल
कस्बे में गुरुवार को मानसून की पहली तेज बारिश ने नगर पालिका की नाला-नाली सफाई व्यवस्था और जल निकासी प्रबंधन की हकीकत उजागर कर दी। तेज आंधी के बाद हुई झमाझम बारिश से तहसील कार्यालय के मुख्य द्वार के बाहर बस स्टैंड जाने वाले प्रमुख मार्ग सहित मुख्य बाजार और कई कॉलोनियों की सड़कों पर एक से दो फीट तक पानी भर गया। कई स्थानों पर नालों और नालियों से पानी की निकासी नहीं होने के कारण सड़कें तालाब जैसी नजर आईं। जलभराव के चलते राहगीरों, वाहन चालकों और व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जबकि कई दुकानों में बारिश का पानी घुस जाने से व्यापारियों का सामान भी भीग गया और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा।
बारिश के दौरान तहसील कार्यालय के सामने हालात सबसे अधिक गंभीर रहे। सड़क पर भरे पानी से गुजरते समय कई दुपहिया वाहनों के इंजन तक पानी में डूब गए, जबकि पैदल निकलने वाले लोगों के कपड़े और सामान भी खराब हो गए। कीचड़युक्त पानी से बाजार क्षेत्र में आवागमन लंबे समय तक बाधित रहा और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं।
स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों ने आरोप लगाया कि नगर पालिका क्षेत्र बनने के बाद से शहर की सफाई और जल निकासी व्यवस्था लगातार उपेक्षा का शिकार रही है। उनका कहना है कि नालों और नालियों की नियमित सफाई नहीं होने तथा सफाई कार्य में केवल औपचारिकता बरते जाने के कारण अधिकांश नाले कचरे और गाद से अटे पड़े हैं। इसी वजह से पहली ही तेज बारिश में पानी का निकास नहीं हो सका और शहर के अनेक हिस्सों में जलभराव की स्थिति बन गई।
व्यापारियों ने यह भी बताया कि बुधवार शाम को पालिका कार्मिकों ने नाला सफाई के नाम पर दुकानों के बाहर रखा सामान हटाने को कहा था। उनका आरोप है कि हाथ से सफाई कराने के बजाय जेसीबी मशीन से नालों की सफाई कराई जाती है, जिससे नालों पर लगे फेरो कवर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। उनका कहना है कि पूर्व में भी इस प्रकार की सफाई से बाजार को लंबे समय तक परेशानी झेलनी पड़ी थी, लेकिन स्थायी समाधान आज तक नहीं हो सका।
स्थानीय लोगों ने जलभराव की समस्या के पीछे वर्षों पुरानी तकनीकी खामी का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार करीब 15 वर्ष पूर्व सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा मुख्य बाजार में नाले का निर्माण कराया गया था। उस समय बस स्टैंड रोड पर तहसील कार्यालय के सामने स्थित कुछ दुकानों के कारण न्यायालयीन स्थगन आदेश होने से नियमानुसार नाला निर्माण नहीं हो सका और मुख्य नाले को मोड़कर पुरानी संकरी नाली से जोड़ दिया गया। लोगों का कहना है कि इसी तकनीकी कमी के कारण तेज बारिश में नाला ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़क पर फैल जाता है और हर वर्ष लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है।
शहरवासियों और व्यापारियों ने नगर पालिका प्रशासन तथा नाला सफाई व्यवस्था से जुड़े ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि जल निकासी व्यवस्था की तकनीकी खामियों को दूर कर नालों की प्रभावी सफाई सुनिश्चित की जाए तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो जिम्मेदार अधिकारियों एवं संबंधित पक्षों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि आगामी बारिश के दौरान शहरवासियों को ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
इनका कहना है…👇
बारिश के दौरान जिन स्थानों पर नालों पर अतिक्रमण के कारण पानी की निकासी प्रभावित हो रही थी, वहां पालिका की टीम और जेसीबी मशीन भेजकर अतिक्रमण को कुछ हद तक हटवा दिया गया है। इसके बाद पानी की निकासी सुचारु करा दी गई है और जहां जलभराव था, वहां अब पानी निकल चुका है।
सुमेरसिंह मीना, अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका मंडावर।
