टोंक के 23वें सामूहिक विवाह सम्मेलन में दिखा अभियान का असर, 5 हजार लोगों ने किया भोजन, जूठन रही नाममात्र
भीम प्रज्ञा न्यूज़ टोंक।
झुंझुनूं से शुरू हुआ “अन्न बचाओ, समृद्धि लाओ—जूठन रोकने का अभियान” अब राजस्थान के विभिन्न जिलों के साथ देश के अन्य हिस्सों तक अपनी पहचान बना रहा है। अभियान के प्रेरक डॉ. पीतराम सिंह गोदारा ने वर्षों से अन्न की बर्बादी रोकने और सामाजिक आयोजनों में भोजन के सम्मान का जो संदेश दिया, वह अब जनचेतना का रूप लेने लगा है। इसी कड़ी में टोंक जिले के डिग्गी कल्याणजी में आयोजित 23वें सामूहिक विवाह सम्मेलन में अभियान की उल्लेखनीय सफलता देखने को मिली।
सम्मेलन में 23 नवविवाहित जोड़ों का वैदिक रीति-रिवाजों के साथ विवाह सम्पन्न हुआ। आयोजन में लगभग 5 हजार लोगों ने सामूहिक भोज ग्रहण किया, लेकिन “अन्न बचाओ, समृद्धि लाओ” अभियान के प्रभाव से जूठन नाममात्र की बची। पूरे पंडाल में अभियान के संदेश वाले बैनर लगाए गए तथा भोजन की बर्बादी रोकने के लिए लगातार जागरूकता का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम में विशेष रूप से पहुंचे डॉ. पीतराम सिंह गोदारा ने उपस्थित लोगों से कहा कि अन्न केवल भोजन नहीं, बल्कि किसानों की मेहनत, प्रकृति का आशीर्वाद और राष्ट्र की समृद्धि का आधार है। उन्होंने लोगों से आवश्यकता के अनुसार ही भोजन लेने और एक दाना भी व्यर्थ नहीं छोड़ने का आह्वान किया। उनके इस संदेश को समाज ने खुले मन से स्वीकार किया और पूरे आयोजन में अनुशासन एवं जागरूकता का प्रेरक उदाहरण देखने को मिला।
अभियान को सफल बनाने में रामधन जाट (पूर्व प्रधानाचार्य, पारली) ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपने सहयोगियों प्रह्लाद, श्रीलाल और नन्दलाल के साथ समय-समय पर मंच और माइक के माध्यम से उपस्थित लोगों से जूठन नहीं छोड़ने की अपील की।
सम्मेलन में डॉ. सतीश पूनिया, कन्हैयालाल चौधरी (कैबिनेट मंत्री, राजस्थान सरकार), राजाराम मील, रामविलास चौधरी (पूर्व जिला प्रमुख, टोंक), चोपड़ा (जिला प्रमुख, जयपुर), राधाकृष्ण लोमरोड़ (पूर्व प्रधान, जायल) तथा कृष्ण कुमार जानू सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने “अन्न बचाओ, समृद्धि लाओ” अभियान की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए इसे समाज के लिए अनुकरणीय पहल बताया।
वक्ताओं ने कहा कि विवाह समारोहों और सामाजिक आयोजनों में भोजन की बर्बादी रोकना समय की सबसे बड़ी सामाजिक आवश्यकता है। झुंझुनूं से प्रारंभ हुआ यह अभियान अब पूरे प्रदेश में सकारात्मक संदेश दे रहा है। यदि प्रत्येक आयोजन में इसे अपनाया जाए तो न केवल अन्न का सम्मान होगा, बल्कि समाज में जिम्मेदारी, संवेदनशीलता और संसाधनों के संरक्षण की संस्कृति भी मजबूत होगी।
