कलमी फलदार पौधों पर कर रहे नवाचार, कम पानी में अधिक उत्पादन देने वाली प्रजातियां विकसित करने का लक्ष्य
भीम प्रज्ञा न्यूज . बुहाना।
जहां एक ओर बढ़ता प्रदूषण, जल संकट और घटते हरित क्षेत्र चिंता का विषय बने हुए हैं, वहीं झुंझुनूं जिले के सहड़ गांव निवासी अजयपाल सिंह चौरा अपनी मेहनत, लगन और नवाचार के दम पर पर्यावरण संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश कर रहे हैं। मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट खिलाड़ी होने के साथ-साथ वे फलदार पौधों की नई किस्में विकसित करने और कलमी पौध तैयार करने के प्रयोगों में जुटे हुए हैं।
अजितपाल सिंह चौरा अपने घर और कार्यस्थल पर गमलों में विभिन्न प्रकार के फलदार पौधों की कलमें तैयार कर रहे हैं। वे बरसात शुरू होने से पहले फलदार पेड़ों की स्वस्थ टहनियों का छिलका हटाकर उस स्थान पर गाय के गोबर से तैयार जैविक खाद को पॉलिथीन में बांध देते हैं। कुछ समय बाद जब वहां जड़ें विकसित हो जाती हैं, तो उस टहनी को अलग कर गमले में रोप दिया जाता है। इस वैज्ञानिक और प्राकृतिक तकनीक से वे उच्च गुणवत्ता वाले कलमी पौधे तैयार कर रहे हैं।
अजितपाल सिंह का उद्देश्य राजस्थान की रेतीली जलवायु के अनुरूप ऐसे हाइब्रिड फलदार पौधे विकसित करना है, जो कम पानी में भी बेहतर उत्पादन दें और किसानों के लिए लाभकारी साबित हों। उनका मानना है कि जलवायु परिवर्तन और घटते जलस्तर को देखते हुए भविष्य की खेती ऐसी पौध प्रजातियों पर आधारित होनी चाहिए, जो कम संसाधनों में अधिक उत्पादन दे सकें।
वर्तमान में अजितपाल सिंह कैम्ब्रिज स्कूल, सिमनी में गेटकीपर के पद पर कार्यरत हैं। विद्यालय की छुट्टी के बाद वे स्कूल परिसर में लगे पौधों की देखभाल करने के साथ-साथ अपने घर पर भी घंटों तक पौधों की कलम तैयार करने, उनकी देखरेख करने और नई तकनीकों पर प्रयोग करने में जुटे रहते हैं। पर्यावरण संरक्षण के प्रति उनका समर्पण उन्हें एक सामान्य कर्मचारी से अलग पहचान दिला रहा है।
अजितपाल सिंह का कहना है कि यदि प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में कुछ पौधे तैयार कर उनका संरक्षण करे, तो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। उनका सपना है कि आने वाले समय में राजस्थान की जलवायु के अनुरूप उन्नत फलदार पौधों की ऐसी किस्में विकसित हों, जिनसे किसानों की आय बढ़े, हरियाली का विस्तार हो और आने वाली पीढ़ियों को स्वच्छ एवं संतुलित पर्यावरण मिल सके।
पर्यावरण प्रेमियों का मानना है कि अजितपाल सिंह चौरा जैसे नवाचार करने वाले लोगों को प्रोत्साहन और तकनीकी सहयोग मिले तो वे न केवल स्थानीय स्तर पर, बल्कि पूरे प्रदेश में पर्यावरण संरक्षण और फलदार पौध उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सकते हैं। उनके प्रयास यह संदेश देते हैं कि संकल्प, श्रम और नवाचार से रेगिस्तान में भी हरियाली की नई इबारत लिखी जा सकती है।
