ग्रामीण प्रतिभाओं ने सरकारी नौकरी में लहराया परचम, तीन विद्यार्थियों के चयन से क्षेत्र में खुशी की लहर
ग्रामीण प्रतिभाओं ने सरकारी नौकरी में लहराया परचम, तीन विद्यार्थियों के चयन से क्षेत्र में खुशी की लहर
भीम प्रज्ञा न्यूज़ | पचेरी।
ग्रामीण क्षेत्र की प्रतिभाओं को नई दिशा देने वाली भीम प्रज्ञा सेंट्रल लाइब्रेरी, बुहाना रोड पचेरी बड़ी ने एक बार फिर सफलता की नई इबारत लिखी है। लाइब्रेरी में अध्ययन करने वाले तीन विद्यार्थियों का हाल ही में सरकारी सेवा में अंतिम रूप से चयन होने पर क्षेत्र में खुशी और उत्साह का माहौल देखने को मिला। विद्यार्थियों की इस उपलब्धि ने न केवल उनके परिवारों को गौरवान्वित किया है, बल्कि ग्रामीण युवाओं में भी प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रति नया आत्मविश्वास जगाया है।
लाइब्रेरी डायरेक्टर मनोज पंवार ने जानकारी देते हुए बताया कि अग्निवीर आर्मी भर्ती में ऋतिक चोरा पुत्र हरिसिंह मेघवाल निवासी सहड़ का बास तथा आशीष पुत्र प्रदीप मेघवाल निवासी ढाणी भालोठ का अंतिम रूप से चयन हुआ है। वहीं पचेरी कला निवासी गौरव लाटा पुत्र लीलाधर लाटा का आर्मी की बीआरओ ग्रुप में अंतिम चयन होने से क्षेत्र में गर्व का माहौल है।
प्रतियोगी परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद लाइब्रेरी परिसर में विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं युवाओं ने चयनित अभ्यर्थियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। इस अवसर पर भीम प्रज्ञा सेंट्रल लाइब्रेरी के सीईओ एडवोकेट हरेश पंवार, मैनेजिंग डायरेक्टर मीना एच. पंवार एवं न्यूज़ एडिटर नवीन कुमार ने चयनित विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
“पे बैक टू सोसायटी” के विचार से शुरू हुई लाइब्रेरी
भीम प्रज्ञा सेंट्रल लाइब्रेरी की स्थापना 5 सितंबर 2022 को भीम प्रज्ञा के संस्थापक एडवोकेट हरेश पंवार द्वारा की। वे एक प्रेरणादायी वक्ता और करियर काउंसलर के रूप में युवाओं के बीच पहचान रखते हैं। ग्रामीण क्षेत्र के जरूरतमंद एवं अभावग्रस्त विद्यार्थियों को बेहतर अध्ययन वातावरण और निशुल्क मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की गई है।
लाइब्रेरी का मूल उद्देश्य बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के “पे बैक टू सोसायटी” के विचार को समाज तक पहुंचाना और ग्रामीण प्रतिभाओं को सीमित संसाधनों में भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा व प्रतियोगी माहौल उपलब्ध कराना है।
अब तक 35 विद्यार्थियों का हो चुका चयन
संस्था से मिली जानकारी के अनुसार अब तक भीम प्रज्ञा सेंट्रल लाइब्रेरी में अध्ययन करने वाले 35 से अधिक विद्यार्थियों का विभिन्न सरकारी सेवाओं में चयन हो चुका है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की है, जिनके परिवार में पहली बार किसी सदस्य को सरकारी नौकरी मिली है।
ग्रामीण परिवेश में स्थित यह लाइब्रेरी शांत वातावरण, प्राकृतिक सौंदर्य और अनुशासित अध्ययन संस्कृति के लिए युवाओं के बीच विशेष पहचान बना चुकी है। यहां केवल पढ़ाई का माहौल ही नहीं, बल्कि करियर काउंसलिंग, विषय चयन, लक्ष्य निर्धारण और प्रतियोगी परीक्षाओं की रणनीति से जुड़ी विशेष मार्गदर्शन सेवाएं भी दी जाती हैं।
युवाओं के लिए बन रही प्रेरणा
भीम प्रज्ञा सेंट्रल लाइब्रेरी आज ग्रामीण युवाओं के लिए उम्मीद और प्रेरणा का केंद्र बनती जा रही है। सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने वाले युवाओं को यहां ऐसा वातावरण मिल रहा है, जो उन्हें आत्मविश्वास और सफलता की ओर अग्रसर कर रहा है। चयनित विद्यार्थियों की उपलब्धियों ने यह साबित कर दिया है कि यदि सही दिशा, मार्गदर्शन और मेहनत मिले तो गांव की प्रतिभाएं भी देश सेवा के बड़े मंच तक पहुंच सकती हैं।
मजदूरों और मेहनतकश परिवारों के बेटों ने लिखी सफलता की नई इबारत
दैनिक भीम प्रज्ञा द्वारा संचालित सेंट्रल लाइब्रेरी, बुहाना रोड पचेरी बड़ी केवल एक अध्ययन केंद्र नहीं, बल्कि ग्रामीण संघर्ष और सपनों को साकार करने का प्रेरणादायी मंच बनती जा रही है। हाल ही में सरकारी सेवा में चयनित हुए तीनों विद्यार्थियों की सफलता के पीछे उनके परिवारों का संघर्ष, त्याग और मेहनत की लंबी कहानी छिपी हुई है, जो आज हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही है।
अग्निवीर आर्मी भर्ती में चयनित ऋतिक चोरा पुत्र हरिसिंह मेघवाल निवासी सहड़ का बास एक साधारण मजदूर परिवार से आते हैं। ऋतिक के पिता हरिसिंह ने स्वयं भी युवावस्था में फौज में भर्ती होने का सपना देखा था, लेकिन सफलता नहीं मिलने के बाद पारिवारिक जिम्मेदारियों और बेरोजगारी के चलते निर्माण कार्य में हेल्पर मजदूरी करने लगे। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने और उनकी पत्नी ने मजदूरी कर अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार देने में कोई कमी नहीं छोड़ी। आज परिवार में पहली बार सरकारी नौकरी मिलने पर पूरे घर में खुशी और गर्व का माहौल है।
वहीं अग्निवीर भर्ती में चयनित आशीष पुत्र प्रदीप कुमार निवासी ढाणी भालोठ की सफलता भी संघर्ष की मिसाल बनकर सामने आई है। बेहतर शिक्षा और भविष्य की उम्मीद में आशीष के पिता गांव छोड़कर पचेरी कस्बे में आकर मजदूरी करने लगे। सीमित आय और कठिन हालात के बावजूद उन्होंने बच्चों की पढ़ाई जारी रखी। आज बेटे के सरकारी सेवा में चयन होने से परिवार की वर्षों की मेहनत रंग लाई है और घर में उत्सव जैसा माहौल देखने को मिल रहा है।
इसी प्रकार पचेरी कला निवासी गौरव लाटा पुत्र लीलाधर लाटा का बीआरओ ग्रिफ में चयन क्षेत्र के लिए प्रेरणादायी उपलब्धि बन गया है। गौरव के पिता लीलाधर लाटा गांव के बस स्टैंड पर स्थित “गौरव मिष्ठान भंडार” पर परंपरागत तरीके से शुद्ध दूध की मिठाइयां और पेड़े बनाकर परिवार का पालन-पोषण करते हैं। वर्षों से अपनी मेहनत और ईमानदारी से लोगों का मुंह मीठा करवाने वाले इस परिवार ने शिक्षा को जीवन का सबसे बड़ा आधार माना। आज बेटे के सरकारी सेवा में चयन होने पर मिठाई की दुकान पर बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।
भीम प्रज्ञा सेंट्रल लाइब्रेरी के सीईओ एडवोकेट हरेश पंवार ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र के प्रतिभाशाली युवाओं को यदि सही मार्गदर्शन, सकारात्मक वातावरण और आत्मविश्वास मिले तो वे किसी भी मुकाम तक पहुंच सकते हैं। उन्होंने कहा कि लाइब्रेरी का उद्देश्य केवल पढ़ाई करवाना नहीं, बल्कि संघर्षरत युवाओं में सपनों को साकार करने का विश्वास जगाना है।
