अंतिम चयन के बाद भी परेशान युवा, प्रशासनिक अस्पष्टता से बढ़ी अभ्यर्थियों और अभिभावकों की चिंता
भीम प्रज्ञा न्यूज.झुंझुनूं
अग्निवीर भर्ती में चयनित युवाओं को इन दिनों दस्तावेज सत्यापन के दौरान गंभीर प्रशासनिक समस्या का सामना करना पड़ रहा है। ग्राम पंचायतों में गोल मोहर उपलब्ध नहीं होने के कारण कई अभ्यर्थियों के चरित्र प्रमाण पत्र अधूरे रह गए हैं और उन्हें कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।अग्निवीर भर्ती में लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षण और अन्य कठिन चरणों को सफलतापूर्वक पार कर अंतिम चयन तक पहुंचे युवाओं के सामने अब दस्तावेज सत्यापन की नई चुनौती खड़ी हो गई है। ग्राम पंचायतों में कार्यालय की गोल मोहर और अधिकृत पदाधिकारी की मोहर को लेकर बनी प्रशासनिक अस्पष्टता के कारण अनेक अभ्यर्थियों के आवश्यक दस्तावेज प्रमाणित नहीं हो पा रहे हैं। सेना भर्ती के लिए जारी दिशा-निर्देशों में अविवाहित चरित्र प्रमाण पत्र को ग्राम पंचायत द्वारा सत्यापित करना अनिवार्य बताया गया है। नोटिफिकेशन में कार्यालय ग्राम पंचायत की गोल मोहर तथा सरपंच अथवा अधिकृत अधिकारी की पद मोहर सहित प्रमाणन का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। इतना ही नहीं, निर्धारित प्रारूप में भी गोल मोहर और पद मोहर का नमूना प्रदर्शित किया गया है।
पंचायतों में प्रशासनिक असमंजस, अभ्यर्थी परेशान
प्रदेश में पंचायत चुनाव समय पर नहीं होने के कारण अनेक ग्राम पंचायतों में निर्वाचित सरपंच नहीं हैं। कहीं प्रशासक नियुक्त किए गए हैं तो कई स्थानों पर प्रशासकीय व्यवस्था में बदलाव हो चुका है। ऐसी स्थिति में कई पंचायतों के अधिकारी और प्रशासक दस्तावेज प्रमाणित करने से बच रहे हैं। अभ्यर्थियों का कहना है कि वे ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और अन्य प्रशासनिक कार्यालयों के लगातार चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें स्पष्ट समाधान नहीं मिल रहा। भर्ती प्रक्रिया की समय-सीमा नजदीक आने से उनकी चिंता लगातार बढ़ रही है।
अंतिम चयन के बाद बढ़ी धड़कनें
अग्निवीर भर्ती में सफलता प्राप्त करने वाले युवाओं और उनके अभिभावकों का कहना है कि वर्षों की मेहनत, प्रतियोगी परीक्षा और शारीरिक परीक्षण के बाद जब अंतिम चयन हुआ तो उम्मीदें जागीं, लेकिन अब केवल एक मोहर और दस्तावेज सत्यापन की समस्या के कारण भविष्य अधर में लटकता दिखाई दे रहा है।
प्रशासन तक पहुंचा मामला
समस्या की गंभीरता को देखते हुए भीम प्रज्ञा द्वारा जिला प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित किया गया। झुंझुनूं जिला कलक्टर अरुण कुमार गर्ग को दूरभाष पर स्थिति से अवगत कराया गया। जिला कलक्टर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए जिला परिषद को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। इसके बाद जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी परशुराम धानुका से संपर्क किया गया। उन्होंने बताया कि इस प्रकार का मामला पहली बार उनके संज्ञान में आया है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में अधिकांश ग्राम पंचायतों में गोल मोहर की नियमित उपयोगिता नहीं होने के कारण कई पंचायतों में यह उपलब्ध ही नहीं है। वहीं जहां प्रशासकीय व्यवस्था लागू है, वहां भी नई मोहरों और अधिकारों को लेकर भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने संबंधित पंचायत समिति विकास अधिकारियों से समन्वय कर समस्या के समाधान का आश्वासन दिया।
बढ़ी समय सीमा, फिर भी समाधान का इंतजार
जानकारी के अनुसार दस्तावेज सत्यापन की अंतिम तिथि पहले 1 जून निर्धारित थी, जिसे बढ़ाकर 6 जून कर दिया गया है। इसके बावजूद अनेक पंचायतों में गोल मोहर और प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं होने से अभ्यर्थियों की परेशानी बरकरार है।
बड़ा सवाल: जिम्मेदार कौन?
यह पूरा मामला प्रशासनिक समन्वय की कमी और स्पष्ट दिशा-निर्देशों के अभाव की ओर संकेत करता है। सवाल यह है कि जब भर्ती प्रक्रिया में ग्राम पंचायत की गोल मोहर अनिवार्य बताई गई है, तो पंचायतों में इसकी उपलब्धता और उपयोगिता को लेकर स्पष्ट व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई?
क्षेत्र के अभ्यर्थियों और अभिभावकों ने जिला प्रशासन तथा पंचायतीराज विभाग से मांग की है कि तत्काल स्पष्ट आदेश जारी कर सभी ग्राम पंचायतों को आवश्यक निर्देश दिए जाएं, ताकि किसी भी चयनित युवा का भविष्य केवल एक मोहर के अभाव में प्रभावित न हो।
समस्या- इनका कहना है-
“अग्निवीर भर्ती के लिए मांगे जा रहे अविवाहित चरित्र प्रमाण पत्र में कार्यालय ग्राम पंचायत की गोल मोहर लगाने का प्रावधान बताया जा रहा है, लेकिन वर्तमान में ग्राम पंचायत में गोल मोहर उपलब्ध नहीं है। पंचायत चुनाव नहीं होने तथा प्रशासकीय व्यवस्था लागू होने के कारण मोहर और प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं। बिना सक्षम आदेश के दस्तावेज प्रमाणित करने में भविष्य में आपत्ति की संभावना रहती है। जैसे ही उच्च अधिकारियों से स्पष्ट निर्देश प्राप्त होंगे, नियमानुसार अभ्यर्थियों के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर किया जाएगा।”
— पंचायत प्रशासक/सरपंच (सविता बोहरा) पचेरी कला
समस्या से राहत
हमने लंबे समय तक कठिन मेहनत कर लिखित परीक्षा, शारीरिक दक्षता परीक्षा और मेडिकल प्रक्रिया पूरी कर अंतिम चयन हासिल किया है। अब दस्तावेज सत्यापन के दौरान ग्राम पंचायत की गोल मोहर और प्रमाणन को लेकर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई कार्यालयों के चक्कर लगाने के बावजूद स्पष्ट समाधान नहीं मिल रहा। हमारी मांग है कि प्रशासन जल्द दिशा-निर्देश जारी कर समस्या का समाधान करे, ताकि किसी भी अभ्यर्थी का भविष्य प्रभावित न हो।”
-ऋतिक अग्निवीर अभ्यर्थी
एक्सपर्ट व्यू*
राजस्थान पंचायती राज नियम, 1996 के नियम 317 में स्पष्ट प्रावधान है कि ग्राम पंचायत, पंचायत समिति एवं जिला परिषद की कार्यालयीन तथा पदाधिकारियों की मोहर होगी, जो संबंधित पंचायतीराज संस्था की संपत्ति मानी जाएगी। इसलिए ग्राम पंचायत में कार्यालय की मोहर रखने एवं उसका उपयोग करने का विधिक प्रावधान मौजूद है। अग्निवीर भर्ती के दस्तावेज सत्यापन में उत्पन्न समस्या मुख्य रूप से नियमों की जानकारी के अभाव और प्रशासनिक भ्रम के कारण सामने आ रही है। जिला प्रशासन एवं पंचायतीराज विभाग को तत्काल स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर अभ्यर्थियों की समस्या का समाधान करना चाहिए, ताकि किसी भी चयनित युवा का भविष्य केवल मोहर संबंधी तकनीकी कारणों से प्रभावित न हो।
-एडवोकेट हरेश पंवार, मास्टर ट्रेनर पंचायतीराज संस्थान
प्रशासनिक जवाब इनका
“अग्निवीर अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन में ग्राम पंचायत की गोल मोहर एवं प्रमाणन से संबंधित समस्या का मामला हमारे संज्ञान में आया है। कई ग्राम पंचायतों में कार्यालयीन मोहर की उपलब्धता एवं उपयोग को लेकर भ्रम की स्थिति प्रतीत हो रही है। संबंधित विकास अधिकारियों से जानकारी लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। हमारा प्रयास रहेगा कि किसी भी चयनित अभ्यर्थी को दस्तावेज सत्यापन में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े और समयबद्ध तरीके से समस्या का समाधान किया जाए।”
-परसाराम धानुका, मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद झुंझुनू
“अग्निवीर अभ्यर्थियों के दस्तावेज सत्यापन में ग्राम पंचायत की मोहर संबंधी समस्या का मामला संज्ञान में आया है। संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। किसी भी पात्र अभ्यर्थी को तकनीकी कारणों से परेशानी नहीं होने दी जाएगी तथा नियमानुसार आवश्यक समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।”
-अरुण कुमार गर्ग, जिला कलेक्टर, झुंझुनूं



