सिविल अस्पताल पलवल में सतीश चोपड़ा के नेतृत्व में सांकेतिक शांतिपूर्ण धरना, भीम आर्मी एवं आज़ाद समाज पार्टी ने दिया समर्थन
विजय रंगा (ब्यूरो चीफ)@ भीम प्रज्ञा न्यूज.पलवल सरकारी अस्पतालों में बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं, डॉक्टरों एवं कर्मचारियों की कमी, मूलभूत सुविधाओं के अभाव तथा मरीजों को लगातार निजी अस्पतालों में रेफर किए जाने के विरोध में मंगलवार को सिविल अस्पताल पलवल में समाजसेवी सतीश चोपड़ा के नेतृत्व में एक दिवसीय सांकेतिक शांतिपूर्ण धरना प्रदर्शन आयोजित किया गया।धरने को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि सरकार द्वारा करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के बावजूद सरकारी अस्पतालों में मरीजों को समुचित उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पतालों में आने वाले गरीब, मजदूर और आम नागरिकों को उचित इलाज देने के बजाय निजी अस्पतालों में रेफर कर दिया जाता है, जिससे उन पर भारी आर्थिक बोझ पड़ता है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है और सरकार को तत्काल इस पर संज्ञान लेना चाहिए।इस अवसर पर भीम आर्मी एवं आज़ाद समाज पार्टी (कांशीराम) पलवल ने भी धरने को अपना पूर्ण समर्थन दिया। पूर्व जिला अध्यक्ष लीगल सेल एडवोकेट शैलेन्द्र जौहरी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं की यह बदहाली आम जनता के साथ अन्याय है।
उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल जनता की सेवा के लिए बनाए गए हैं, न कि मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजने के लिए। यदि सरकार जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं करा सकती तो यह उसकी नीतियों की विफलता है।एडवोकेट शैलेन्द्र जौहरी ने कहा कि आदरणीय सांसद एडवोकेट चंद्रशेखर आज़ाद लगातार शिक्षा और स्वास्थ्य को प्रत्येक नागरिक का मौलिक अधिकार बनाने की बात करते रहे हैं। उन्होंने कहा है कि देश के गरीब और वंचित वर्ग को भी उच्च स्तर की शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। आज का यह आंदोलन भी उसी सोच को आगे बढ़ाने का प्रयास है।
कार्यक्रम में आज़ाद समाज पार्टी के जिला अध्यक्ष गौतम लोहगढ़ , डॉ. नेम सिंह , एडवोकेट सौरव , एडवोकेट अनिल सहित अनेक सामाजिक कार्यकर्ता एवं पार्टी पदाधिकारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में सतीश चोपड़ा जी के जनहितकारी संघर्ष का समर्थन करते हुए सरकार से मांग की कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की नियुक्ति, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, पर्याप्त दवाइयों की व्यवस्था तथा मरीजों को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जाए।धरने के माध्यम से चेतावनी दी गई कि यदि सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था में शीघ्र सुधार नहीं किया गया और मरीजों को अनावश्यक रूप से निजी अस्पतालों में रेफर करने की प्रक्रिया बंद नहीं हुई, तो जनता के हित में बड़े स्तर पर लोकतांत्रिक आंदोलन चलाया जाएगा।