बुहाना-पचेरी मार्ग पर स्थित गड्ढे से बिगड़ा संतुलन, दर्दनाक हादसे में गई बीएसएफ जवान की जान
कब जागेगा विभाग? एक और जवान सड़क हादसे का शिकार
बाइक-ईको टक्कर में बीएसएफ जवान की जान गई, दोनों बेटे अस्पताल में
भीम प्रज्ञा न्यूज.पचेरी। बुहाना-पचेरी मार्ग पर शिवसिंहपुरा मोड़ के पास सोमवार को हुए भीषण सड़क हादसे ने पूरे क्षेत्र को शोक में डुबो दिया। इस हादसे में भारतीय सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान विनोद कुमार की मौत हो गई, जबकि उनके दोनों पुत्र देव (18) और दक्ष (13) गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे की खबर मिलते ही जयसिंहपुरा गांव सहित पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। जानकारी के अनुसार जयसिंहपुरा निवासी विनोद कुमार अपने दोनों पुत्रों के साथ बाइक पर सवार होकर बुहाना की ओर जा रहे थे। शिवसिंहपुरा मोड़ के पास अचानक उनकी बाइक सामने से आ रही ईको गाड़ी से टकरा गई। टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक के आगे के हिस्से से परखच्चे उड़ गए और तीनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए।घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत पुलिस और एम्बुलेंस को सूचना दी। 108 एम्बुलेंस ने घायलों को बुहाना सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें झुंझुनूं रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान बीएसएफ जवान विनोद कुमार ने दम तोड़ दिया।

प्रत्यक्षदर्शियों का दावा: सड़क का गड्ढा बना हादसे की वजह
मौके पर मौजूद राहगीरों और स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क पर बने गहरे गड्ढे के कारण बाइक का संतुलन बिगड़ गया। संतुलन बिगड़ते ही बाइक सामने से आ रही ईको गाड़ी से टकरा गई। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि सड़क की समय पर मरम्मत कर दी जाती तो शायद यह हादसा टल सकता था और एक परिवार का सहारा आज जीवित होता।
कई बार शिकायतों के बावजूद नहीं जागा पीडब्ल्यूडी विभाग
ग्रामीणों का कहना है कि बुहाना-पचेरी मार्ग पर जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। इस संबंध में कई बार पीडब्ल्यूडी विभाग को शिकायतें दी गईं। जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों ने भी सड़क की मरम्मत की मांग उठाई, लेकिन विभाग की ओर से केवल आश्वासन ही मिले। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जब कोई बड़ा हादसा होता है तो विभाग कुछ गड्ढों में मिट्टी डलवाकर खानापूर्ति कर देता है, लेकिन स्थायी समाधान कभी नहीं किया जाता।
देश की रक्षा करने वाला जवान सड़क की बदहाली का शिकार
करीब वर्ष 2006 में बीएसएफ में भर्ती हुए विनोद कुमार ने लगभग दो दशक तक देश सेवा की। सीमाओं पर देश की सुरक्षा करने वाला यह जवान आतंकियों और दुश्मनों से नहीं डरा, लेकिन अपने ही क्षेत्र की जर्जर सड़क ने उसकी जिंदगी छीन ली। विनोद कुमार अपने पीछे पिता कर्ण सिंह, माता सावित्री देवी, पत्नी मनीषा और दो पुत्रों का भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।

पहले भी हो चुके हैं कई हादसे
ग्रामीणों के अनुसार यह पहला हादसा नहीं है। इससे पहले भी इसी मार्ग पर कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं। भिर्र गांव के एक फौजी की भी सड़क दुर्घटना में जान जा चुकी है। वहीं बेरला निवासी एक मजदूर भी गड्ढे के कारण हादसे का शिकार होकर गंभीर रूप से घायल हुआ था और उसे जयपुर रेफर करना पड़ा था।लोगों का कहना है कि इस सड़क पर रोजाना छोटे-बड़े हादसे होते रहते हैं, लेकिन मामूली चोट लगने के कारण अधिकतर मामले सामने नहीं आ पाते।
ग्रामीणों में रोष, जिम्मेदारी तय करने की मांग
बीएसएफ जवान की मौत के बाद क्षेत्र में पीडब्ल्यूडी विभाग के प्रति भारी आक्रोश है। ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने सड़क की तत्काल मरम्मत कराने तथा हादसे के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सड़क की मरम्मत कर दी जाती तो आज एक जवान की जान नहीं जाती। अब सवाल यह है कि आखिर इन मौतों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
पुलिस कर रही जांच
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। दुर्घटना के वास्तविक कारणों की पड़ताल की जा रही है। वहीं पूरे क्षेत्र की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन और पीडब्ल्यूडी विभाग इस दर्दनाक हादसे से कोई सबक लेते हैं या नहीं।

