एक कार्रवाई के बाद भी अधूरी रही मुहिम, पचेरी बॉर्डर से चिड़ावा तक सड़क किनारे संचालित शराब ठेकों पर कार्रवाई की मांग तेज
भीम प्रज्ञा न्यूज.पचेरी/झुंझुनूं।
राष्ट्रीय राजमार्ग पर नियमों की अनदेखी करते हुए संचालित शराब की दुकानों को लेकर दैनिक भीम प्रज्ञा द्वारा प्रकाशित खोजी खबर का असर दिखाई देने लगा है। समाचार प्रकाशित होने के बाद प्रशासन ने अलीपुर-रामसर के समीप सरकारी जोहड़ भूमि पर संचालित एक शराब ठेके को हटाकर अन्य स्थान पर स्थानांतरित कर दिया। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल एक दुकान तक सीमित रही, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई अन्य शराब दुकानें अब भी नियमों के विपरीत संचालित हो रही हैं।
एक कार्रवाई, लेकिन कई सवाल अब भी बाकी
20 जून 2026 के अंक में प्रकाशित ग्राउंड रिपोर्ट में फतेहपुर-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग पर पचेरी बॉर्डर, पचेरी खुर्द, डूमोली खुर्द, मुरादपुर, भोदन, सिंघाना, मोई, गाड़ा खेड़ा, लाखू और चिड़ावा तक संचालित शराब दुकानों की स्थिति उजागर की गई थी। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि कई दुकानों का संचालन स्वीकृत स्थल से हटाकर सड़क किनारे किया जा रहा है।
स्वीकृत स्थान खाली, अस्थायी दुकानों में कारोबार
स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिन स्थानों पर आबकारी विभाग ने शराब दुकानों का आवंटन किया था, वे स्थान आज भी खाली या बंद पड़े हैं, जबकि वास्तविक बिक्री ट्रेन की पुरानी बोगियों अथवा अस्थायी ढांचों में सड़क किनारे की जा रही है। इससे नियमों की पारदर्शिता और विभागीय निगरानी पर गंभीर प्रश्न उठ रहे हैं।
हाईवे से दूरी के नियमों पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि न्यायालयों द्वारा राष्ट्रीय राजमार्गों के निकट शराब दुकानों के संचालन एवं सड़क किनारे उनके संकेतक और विज्ञापन बोर्ड लगाने पर स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद कई स्थानों पर सड़क के बिल्कुल समीप दुकानें और बड़े-बड़े बोर्ड दिखाई देते हैं। लोगों का आरोप है कि इन निर्देशों का पालन प्रभावी रूप से नहीं कराया जा रहा।
देर रात तक बिक्री और बढ़ रही सामाजिक चिंता
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि कई शराब दुकानें निर्धारित समय के बाद भी देर रात तक खुली रहती हैं। देर रात होने वाली भीड़ से आसपास के गांवों के लोगों, विशेषकर महिलाओं और किसानों को खेतों तथा घरों तक आने-जाने में असुविधा का सामना करना पड़ता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई कि ऐसी स्थिति सामाजिक वातावरण और कानून-व्यवस्था दोनों के लिए चुनौती बन सकती है।
विभागीय कार्रवाई पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि शिकायतें किए जाने के बावजूद अधिकांश मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही। उनका आरोप है कि यदि एक दुकान हटाई जा सकती है तो अन्य नियमविरुद्ध संचालित दुकानों के विरुद्ध भी समान कार्रवाई होनी चाहिए। लोगों ने आबकारी विभाग से पूरे मार्ग का संयुक्त निरीक्षण कर नियमों के अनुरूप कार्रवाई करने की मांग की है।
जनहित में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग
क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि राष्ट्रीय राजमार्ग पर संचालित सभी शराब दुकानों की वास्तविक स्थिति का सर्वे कराया जाए, स्वीकृत स्थानों का सत्यापन किया जाए तथा जहां कहीं भी नियमों का उल्लंघन पाया जाए, वहां निष्पक्ष एवं समान कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। उनका कहना है कि कानून का पालन सभी पर समान रूप से होना चाहिए और जनहित सर्वोपरि रहना चाहिए।
