*91 वीं पुण्य स्मृति -*
(27 मई,1935)
भीम प्रज्ञा सर्च हिस्ट्री।

27 मई 2026 परम पूज्य माता रमाबाई आंबेडकर की 91 वीं पुण्यतिथि है। यह नींव का वो पत्थर जिस पर भारत के संविधान निर्माता डाॅ भीमराव आम्बेडकर साहेब रूपी इमारत का सृजन हुआ। आज ही के दिन 1935 को माता रमाबाई आंबेडकर इस संसार से मात्र 37 वर्ष की आयु में अपने *’साहेब’* को अकेला छोड़ चिरनिद्रा में सो गईं थीं। इनके कठोर त्याग, साहस, अपनी ममता को अपनी आँखों से निकले आँसुओं की ओट में छिपा कर और दरिद्रता की स्थिति में किए गए जीवन संघर्ष की बदौलत ही आज हम अपने, *अपने बच्चों सहित अपनी पीढ़ियों को सम्मान की ठंडी छाँव में लेकर बैठे हैं।*
*माता रमाबाई आंबेडकर -* ज्योतिपुंज महामानव डाॅ भीमराव अम्बेडकर साहब की पत्नी थीं। आपका जन्म 7 फरवरी,1898 सोमवार को पिता श्री भीकू जी के यहाँ हुआ। 9 वर्ष की उम्र में आपका विवाह मुम्बई की एक चाल में भीमराव अंबेडकर साहब के साथ हुआ। आपने अपने अर्धांगनी होने की परिभाषा को अक्षरशः पूर्ण किया। डाॅ अंबेडकर साहब की शिक्षा और संघर्ष को मुकाम तक पहुंचाने का श्रेय केवल माता रमाबाई आंबेडकर को ही जाता है। आपने कभी भी किसी भी स्थिति में अपने ग़रीबी के संघर्ष, कष्टदायक शारीरिक पीड़ा, कलेजे के टुकड़ों के विछोह के अपार दुखों की लकीरों को अपने चेहरे पर बाबा साहेब के सामने नहीं आने दिया। भीमराव आंबेडकर को मानव जीवन दाता, बोधिसत्व, संविधान निर्माता की ऊंचाईयों के शिखर पर सजा कर विश्व के डॉ भीमराव आंबेडकर साहेब बनाने वाली मातृशक्ति माता रमाबाई आंबेडकर ने अपने साहेब की शिक्षा और सामाजिक तप की वेदी पर अपने चार कलेजे के टुकड़ों (गंगाधर, रमेश, राजरत्न, बेटी इंदू) का दरिद्रता और समय पर उपचार के अभाव में बलिदान कर दिया। केवल बड़े पुत्र यशवंत राव आंबेडकर ही माता रमाबाई के पास रहे।
*माता रमाबाई आंबेडकर के चार कलेजे के टुकड़ों के बलिदान से ही आज हम हमारे अपने कलेजे के टुकड़ों का जीवनयापन शानो-शौकत से कर रहे हैं। और उच्च शिक्षा एवं सरकारी प्रशासनिक अफसर, शिक्षक, प्रबंधक, डाक्टर, इंजीनियर आदि उच्च पदों पर बैठे हैं।* यह किसी और देवी की अनुकम्पा नहीं है। यह हमें नहीं भूलना चाहिए। हमें आत्मचिंतन करना होगा।
27 मई, 1935 सोमवार को 37 वर्ष की आयु में अपने घर राजगृह दादर, मुंबई में कष्टप्रद रोग के बीच अपनी जिंदगी की दौड़ हार गईं, बाबा साहेब के जीवन की इमारत की नींव की ईंट इस दिन निर्जीव हो गई।
माता रमाबाई आंबेडकर के अंतिम शब्द का भावार्थ हमारे लिए यही रहा होगा –
*”मैं छोड़ चली,मेरे अपने साहेब तुम्हारे पास।*
*मेरे साहेब की लाज रखना।”*
हमारे घरों में माता रमाबाई आंबेडकर जी की फोटो होनी चाहिए ताकि हमारी पीढ़ी बच्चों को माता रमाबाई आंबेडकर जी के संबंध में जानकारी रहे।
पुण्यतिथि पर हमारी माता रमाबाई आंबेडकर के अदृश्य पावन चरणों में कोटी-कोटी नमन। *सादर श्रद्धांजलि।* 💐🙏🏻😔
( *नोट -* यह तथ्य बिलकुल गलत है कि सबसे छोटे पुत्र राजरत्न की मृत्यु के समय डाॅ अंबेडकर साहब गोल मेज सम्मेलन में भाग लेने जा रहे थे और माता रमा बाई ने उनको रोका था।)
जय भारत 🇮🇳
*डाॅ गुलाब चन्द जिन्दल ‘मेघ’*
केरियर काउंसलर
अजमेर।
9460180510
