सुमेर मीणा
भीम प्रज्ञा न्यूज.बड़ागांव।
पाँच जून को पूरे विश्व में पर्यावरण दिवस मनाये जाने की खाना पूर्ति की गई। क्या सरकारी क्या प्राइवेट सेक्टर सभी में प्रदूषण कम करने के कागजी घोड़े दौड़ाये जाएँगे असल में जीरो ग्राउण्ड पर प्रयास नहीं करेंगे तब तक प्रदूषण कम नहीं होगा ।
साल दर साल पृथ्वी का तापमान बढ़ता जा रहा है पहाड़ दरक रहे हैं ग्लेशियर सिमटते जा रहे हैं जंगलों पहाड़ों पर आग अपना तांडव मचा रही है कहीं बादल फट रहे हैं कहीं नहरों नदियों में पशुओं व मानव की लाशें बह रही हैं एवरेष्ट को भी अछूता नहीं छोड़ा वहाँ भी प्लास्टिक कचरे के ढेर लगे हैं। यह भयावह स्थिति एक साल में पैदा नहीं हुई सैंकड़ों सालों से इस डेंजर पॉइंट की ओर हम बढ़ते रहे हैं यदि साल दर साल पर्यावरण प्रदूषण को कम करने के प्रयास करते जाते तो विश्व आज प्रदूषण रूपी बम के मुहाने पर बैठा नहीं होता ।हमने जंगलों को नहीं छोड़ा कारखानों मिलो का विषैला अपशिष्ट सीवर का गन्दा पानी नदियों में डाल कर जलजीवों पर कहर ढाया। प्लास्टिक कचरे के पहाड़ के पहाड़ सैंकड़ो हेक्टर जमीन पर खड़े कर दिए निराश्रित पशु उसे खाकर अपनी जान दे रहे हैं ।तेल चालित वाहनों के प्रदूषण से सड़क पर चलना मुश्किल हो गया है ।
अब भी समय है यदि प्रत्येक व्यक्ति प्रदूषण बचाने का संकल्प ले धरातल पर कार्य करे तो काफ़ी हद तक राहत मिल सकती है ।अपने या अपने परिजनों के जन्म दिन पुण्यतिथि वैवाहिक वर्षगांठ पर एक पेड़ लगाये और उसकी परवरिश की जाए,प्लास्टिक थैलियों कप गिलास व सिंगल यूज़ से तौबा करें उत्सवों पर ध्वनि प्रदूषण नहीं फैलाएं सीवर के गंदे पानी को ट्रीटमेंट प्लांट के द्वारा साफ़ कर सिंचाई में काम लें तेल से चलने वाले वाहनों के स्थान पर वैकल्पिक वाहन काम में लें सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करें मेडिकल वेस्ट का उचित निपटान करें घर का गंदा पानी सोखता गड्ढे में डालें खुले में शौच न करें पराली का निस्तारण सही तरीके से करें बिजली बनाने के लिए सौर पैनल पवन ऊर्जा का उपयोग करें तो निश्चित रूप से वातावरण शुद्ध होने में योगदान मिलेगा ।
