“जिन घरों में पीढ़ियां पली-बढ़ीं, आज उन्हीं पर उजड़ने की तलवार; महुखुर्द में ग्रामीणों का सामूहिक आक्रोश, पंचायत से मांगा संरक्षण”
मनोज खंडेलवाल भीम प्रज्ञा @ न्यूज.मंडावर
ग्राम महुखुर्द में वर्षों से बसे 38 परिवारों के सिर पर बेघर होने का संकट मंडराने लगा है। मकान हटाने और स्थान खाली करने के नोटिस मिलने के बाद गुरुवार को ग्रामीणों का सब्र टूट गया और बड़ी संख्या में महिला-पुरुष एकजुट होकर महुखुर्द के ग्राम पंचायत भवन पहुंच गए। यहां ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत प्रशासक पुष्पेंद्र शर्मा को ग्राम विकास अधिकारी कमलेश मीना की मौजूदगी में सामूहिक ज्ञापन सौंपते हुए अपने अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई। ग्रामीणों का कहना है कि वे कई दशकों से गांव में अपने-अपने मकानों में निवास कर रहे हैं। उनके पास ग्राम पंचायत द्वारा जारी पट्टे, विद्युत कनेक्शन, बिजली बिलों की रसीदें, मतदाता सूची में नाम सहित अन्य सरकारी अभिलेख मौजूद हैं, जो उनके वैध और लंबे समय से स्थापित निवास के प्रमाण हैं। इसके बावजूद मकान हटाने के नोटिस मिलने से परिवारों के सामने भविष्य को लेकर गहरी चिंता खड़ी हो गई है। ग्रामीणों ने कहा कि जिन घरों में उनके बच्चे बड़े हुए, जिन आंगनों में पीढ़ियां पली-बढ़ीं, आज उन्हीं घरों को छोड़ने की नौबत आ गई है। ज्ञापन में ग्रामीणों ने पंचायत से मांग की कि पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए ग्राम सभा और पंचायत स्तर पर प्रस्ताव पारित किया जाए तथा जिला प्रशासन, उपखंड अधिकारी और अन्य सक्षम अधिकारियों को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया जाए। साथ ही यह अनुशंसा भी की जाए कि किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई से पहले सभी दस्तावेजों, पट्टों और वास्तविक परिस्थितियों का निष्पक्ष परीक्षण किया जाए तथा प्रभावित परिवारों को न्यायोचित अवसर दिया जाए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि बिना वैकल्पिक व्यवस्था और उचित समाधान के यदि वर्षों से बसे परिवारों को हटाया गया तो यह केवल मकानों का मामला नहीं रहेगा, बल्कि दर्जनों परिवारों के आशियाने, आजीविका और सामाजिक अस्तित्व पर सीधा प्रहार होगा। ग्रामीणों की पीड़ा उनके शब्दों में साफ झलक रही थी कि “घर केवल ईंट-पत्थरों से नहीं बनते, उनमें पीढ़ियों की यादें और जीवन की कमाई बसती है।” इसी भावना के साथ ग्रामीणों ने पंचायत से उनके पक्ष में खड़े होकर न्याय दिलाने की मांग की। इस दौरान ग्रामीण राधाकिशन मीना, पूर्व उप सरपंच सीताराम महावर, बद्री प्रसाद महावर, बिजेंद्र कोली, सम्पत कोली, जयनारायण मीना, अमित कुमार मीना, पवन कुमार मीना, किरोड़ीलाल मीना, रामजीलाल मीना, रामोतार मीना, लल्लू हरिजन, गोपाल हरिजन, मुरारी लाल महावर, किशन कोली, बुद्धाराम कोली, धन्नालाल कोली, विजय कुमार मीना, सोमात्या मीना, सुखराम कोली, शंकर कोली, कजोड़ कोली, लखनलाल महावर, महेश महावर, घनश्याम महावर सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे। वहीं महिलाओं में बसबाई महावर, पूर्व वार्ड पंच रेखा महावर, रामकली मीना, रोशनी देवी मीना, रीना देवी हरिजन, गुड्डी महावर, अनोखी महावर सहित अनेक महिलाओं ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हुए प्रभावित परिवारों के समर्थन में आवाज बुलंद की।
गांव में इस मुद्दे को लेकर चर्चा का माहौल है। अब सबकी निगाहें पंचायत और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हैं कि दशकों से बसे इन परिवारों को राहत मिलती है या फिर उनके आशियानों पर मंडरा रहा संकट और गहरा होता है। “जब बात छत की हो, तो हर दस्तक इंसाफ के दरवाजे तक पहुंचनी चाहिए”—महुखुर्द के ग्रामीण फिलहाल इसी उम्मीद के सहारे न्याय की राह देख रहे हैं।
इनका कहना है…👇
“महुखुर्द गांव की जिस भूमि को लेकर विवाद सामने आया है, वह राजस्व अभिलेखों में चारागाह भूमि के रूप में एक ही खसरा नंबर में दर्ज है। प्रकरण वर्तमान में नायब तहसीलदार न्यायालय में विचाराधीन है तथा इस संबंध में उच्च न्यायालय में भी रिट याचिका लंबित है। ऐसे में मामले में अंतिम निर्णय संबंधित न्यायालयों के आदेश एवं फैसले के आधार पर ही लिया जाएगा।”
संतोष गुप्ता, तहसीलदार, बैजूपाड़ा
