सपनों को दी नई उड़ान, परिवार और गांव में खुशी की लहर; बेटियों की शिक्षा बनी प्रेरणा का स्रोत
भीम प्रज्ञा न्यूज.पचेरी। कहा जाता है कि जब बेटियों को अवसर और प्रोत्साहन मिलता है, तो वे न केवल अपने परिवार बल्कि पूरे समाज का नाम रोशन करती हैं। झुंझुनूं जिले के सांतोर गांव की होनहार बेटी प्रियंका यादव ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट-2026) में सफलता हासिल कर अपने सपनों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त कर दिया है। अब वह डॉक्टर बनकर समाज सेवा का संकल्प पूरा करने की दिशा में अग्रसर हैं। प्रियंका यादव का चयन नीट-2026 में होने पर परिवार सहित पूरे गांव में उत्साह और गौरव का माहौल है। वह अपने परिवार की पहली सदस्य हैं, जिन्हें डॉक्टर बनने का सौभाग्य प्राप्त होगा। उनकी इस उपलब्धि ने यह साबित कर दिया है कि ग्रामीण परिवेश की बेटियां भी अपनी मेहनत, लगन और संकल्प के बल पर राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त कर सकती हैं।
परिवार का मिला भरपूर सहयोग
प्रियंका के पिता मनोज कुमार भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं, जबकि उनकी माता पूनम देवी गृहिणी हैं। परिवार ने सदैव उनकी शिक्षा और सपनों को प्राथमिकता दी, जिसका परिणाम आज पूरे परिवार के लिए गर्व का विषय बन गया है।
दादा ने मिठाई बांटकर मनाई खुशी
प्रियंका की सफलता से सबसे अधिक भावुक और प्रसन्न उनके दादा एवं वरिष्ठ नागरिक जगबीर सिंह नजर आए। उन्होंने गांव के बड़े-बुजुर्गों और शुभचिंतकों के बीच मिठाई वितरित कर अपनी खुशी साझा की। उन्होंने कहा, “मेरे लिए यह गर्व का क्षण है कि मेरी पोती डॉक्टर बनने जा रही है। अब मुझे डॉक्टर की दादा कहलाने का सौभाग्य मिलेगा। हमें विश्वास है कि वह चिकित्सा सेवा के माध्यम से समाज के लिए उत्कृष्ट कार्य करेगी।”
बेटियों की शिक्षा का प्रेरणादायक संदेश
प्रियंका यादव की उपलब्धि ग्रामीण समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि बेटियों की शिक्षा में किया गया निवेश कभी व्यर्थ नहीं जाता। आज बेटियां शिक्षा, विज्ञान, चिकित्सा और प्रशासन जैसे हर क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। उनकी सफलता उन अभिभावकों के लिए भी प्रेरणा है, जो अपनी बेटियों के सपनों को पंख देना चाहते हैं।
गांव के लिए गौरव का क्षण
प्रियंका की सफलता ने सांतोर गांव का गौरव बढ़ाया है। ग्रामीणों और परिजनों ने उन्हें उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं देते हुए आशा व्यक्त की कि वह एक संवेदनशील और कुशल चिकित्सक बनकर समाज के अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने का कार्य करेंगी।
