भीम प्रज्ञा न्यूज.पचेरी। थाना पचेरी कलां क्षेत्र के रसूलपुर अहीरान गांव के 19 वर्षीय युवा जिज्ञांशु ने मृत्यु के बाद भी मानवता की ऐसी मिसाल कायम की है, जो समाज के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। सेना में भर्ती होकर देश सेवा का सपना देखने वाला यह होनहार युवक भले ही अपनी मंजिल तक नहीं पहुंच सका, लेकिन अंगदान के माध्यम से तीन जरूरतमंद लोगों को नया जीवन देकर अमर हो गया। जानकारी के अनुसार 23 मई की रात करीब नौ बजे जिज्ञांशु बाइक से पचेरीबाड़ी क्षेत्र में एटीएम से रुपये निकालने जा रहा था। इसी दौरान सड़क दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गया। दुर्घटना के बाद उसे तत्काल उपचार के लिए नारनौल के अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए जयपुर रेफर कर दिया गया। परिजनों ने उसे जयपुर के टोंक रोड स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां चिकित्सकों की टीम ने लगातार उसके जीवन को बचाने के प्रयास किए। हालांकि सिर में गंभीर चोट लगने के कारण जिज्ञांशु की हालत लगातार नाजुक बनी रही और बुधवार को चिकित्सकों ने उसे ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
यह खबर सुनते ही परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। जिस बेटे को सेना की वर्दी में देश की सेवा करते देखने के सपने परिवार ने संजोए थे, वह सपना एक पल में बिखर गया। इसी दौरान अस्पताल के चिकित्सकों ने जिज्ञांशु के परिजनों को अंगदान के महत्व के बारे में बताया और उन्हें इस दिशा में प्रेरित किया। अपने जवान बेटे को खोने के गहरे दुख के बावजूद परिवार ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए अंगदान का निर्णय लिया। परिवार की सहमति के बाद अस्पताल की विशेषज्ञ टीम, एसएमएस मेडिकल कॉलेज जयपुर और एम्स जोधपुर के चिकित्सकों ने अंगों का सफल रिट्रीवल किया।
जिज्ञांशु की एक किडनी निजी अस्पताल में भर्ती एक मरीज को प्रत्यारोपित की गई, जबकि दूसरी किडनी एसएमएस अस्पताल जयपुर में एक जरूरतमंद मरीज को लगाई गई। इसके अलावा उसका लीवर ग्रीन कॉरिडोर के माध्यम से जोधपुर भेजा गया, जहां एम्स जोधपुर में एक मरीज को नया जीवन मिला। जिज्ञांशु के इस महान कार्य ने यह साबित कर दिया कि इंसान की महानता केवल उसके जीवन तक सीमित नहीं होती, बल्कि वह अपने जाने के बाद भी दूसरों के जीवन में उम्मीद की रोशनी जगा सकता है। गांव सहित पूरे क्षेत्र में जिज्ञांशु और उसके परिवार के इस निर्णय की सराहना की जा रही है। लोगों का कहना है कि दुख की इस घड़ी में परिवार द्वारा लिया गया यह फैसला समाज के लिए एक अनुकरणीय उदाहरण है।
जिज्ञांशु भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उसके द्वारा दान किए गए अंग तीन परिवारों के लिए नई उम्मीद, नया जीवन और नई खुशियां लेकर आए हैं। उसकी यह अमूल्य देन हमेशा मानवता की मिसाल के रूप में याद की जाएगी।



