बीकानेर में खजूर की खेती बनी किसानों की कमाई का जरिया, अच्छे उत्पादन और भाव से बढ़ा रुझान
भीम प्रज्ञा न्यूज.बीकानेर@सोहनलाल परिहार
बीकानेर जिले में खजूर की खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है। जिले में वर्तमान में करीब 350 हेक्टेयर क्षेत्र में खजूर के बाग हैं। इस वर्ष बेहतर उत्पादन और बाजार में 50 से 80 रुपये प्रति किलो तक अच्छे भाव मिलने से किसानों में खजूर की खेती के प्रति उत्साह बढ़ा है। कई किसानों को प्रति पौधा 80 से 100 किलो तक फल उत्पादन मिला है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। बीकानेर का खजूर दिल्ली, चंडीगढ़, हरियाणा और पंजाब सहित अन्य राज्यों में भी भेजा जा रहा है। उद्यान विभाग के सहायक निदेशक मुकेश गहलोत ने बताया कि राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत पश्चिमी राजस्थान में खजूर पौधारोपण क्षेत्र विस्तार की योजना के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। बीकानेर को खजूर हब के रूप में विकसित करने के प्रयास सफल हो रहे हैं और किसान इस फसल से अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। प्रगतिशील किसान शिवकरण कूकणा, जय भगवान, ओ.पी. हर्ष, बृजमोहन चांडक और केसरी चंद भूरा ने बताया कि इस बार अच्छी पैदावार और बेहतर बाजार भाव के कारण खजूर उत्पादन से उनकी आमदनी लगभग दोगुनी हो गई है।
उपनिदेशक उद्यान (अनुसंधान एटीसी) प्रेमाराम ने बताया कि विभाग की अनुदान योजना के तहत किसान खजूर का बगीचा स्थापित कर सकते हैं। योजना के तहत प्रति हेक्टेयर 156 पौधों की आवश्यकता होती है, जिनमें 148 मादा और 8 नर पौधे शामिल हैं। उन्होंने बताया कि टिश्यूकल्चर से तैयार पौधों पर प्रति पौधा 3,000 रुपये या इकाई लागत का 75 प्रतिशत तथा ऑफशूट पौधों पर निर्धारित लागत का 75 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। एक किसान को न्यूनतम 0.5 हेक्टेयर और अधिकतम 4 हेक्टेयर क्षेत्र में पौधारोपण पर अनुदान मिल सकता है। योजना का लाभ लेने के लिए ड्रिप सिंचाई प्रणाली अनिवार्य है तथा आवश्यक दस्तावेजों के साथ उद्यान विभाग में आवेदन करना होगा। उद्यान विभाग के अनुसार किसान खजूर के ऑफशूट पौधे राजकीय फार्म सगरा भोजका (जैसलमेर), मैकेनाइज्ड कृषि फार्म खारा (बीकानेर), कृषि विश्वविद्यालयों एवं अनुभवी किसानों से प्राप्त कर सकते हैं। वहीं टिश्यूकल्चर पौधे डीबीटी से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं और अधिकृत संस्थानों से उपलब्ध हैं।
