भीम प्रज्ञा न्यूज.झुंझुनूं।

स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को स्काउट्स मैदान में जिला प्रशासन एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद के संयुक्त तत्वाधान में जिला स्तरीय ‘विभाजन विभीषिका’ संगोष्ठी एवं युवाओं से संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में स्वतंत्रता संग्राम, वर्ष 1947 में देश के विभाजन की त्रासदी, लाखों लोगों के संघर्ष एवं विस्थापन तथा वर्तमान पीढ़ी की राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारियों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। कार्यक्रम में नगरीय निकाय एवं स्वायत्त शासन विभाग के मंत्री झाबर सिंह खर्रा मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। मंत्री झाबर सिंह खर्रा ने अपने संबोधन में भारत के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि देश की आजादी केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि करोड़ों देशवासियों के संघर्ष, त्याग, बलिदान और राष्ट्रभावना का परिणाम है। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास को व्यापक परिप्रेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है। इसमें विभिन्न विचारधाराओं, संगठनों, सामाजिक आंदोलनों और आमजन की भूमिका को समझकर ही नई पीढ़ी आजादी के वास्तविक महत्व को जान सकती है।


नई पीढ़ी को सही इतिहास की जानकारी जरूरी:

खर्रा ने कहा कि यदि नई पीढ़ी को सही इतिहास और विभाजन विभीषिका के संघर्ष की जानकारी होगी, तो निश्चित रूप से उसके मन में राष्ट्र के प्रति प्रेम, समर्पण और त्याग का भाव उत्पन्न होगा। उन्होंने कहा कि इतिहास की पीड़ा को जानना केवल अतीत को याद करना नहीं, बल्कि वर्तमान और भविष्य के लिए उससे सीख लेना है। उन्होंने कहा कि भारत के स्वतंत्रता संग्राम की यात्रा में राष्ट्रवाद, सामाजिक जागरण और सांस्कृतिक एकता की भावना महत्वपूर्ण रही है। उन्होंने राष्ट्रवादी विचारधारा का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्र को सर्वोपरि मानने और समाज को संगठित करने की भावना ने देश में राष्ट्रीय चेतना को मजबूत करने में योगदान दिया। उन्होंने कहा कि देश की एकता, अखंडता, सांस्कृतिक विरासत और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की भावना स्वतंत्रता के बाद के भारत के निर्माण में भी महत्वपूर्ण है। बकौल खर्रा स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन की त्रासदी को राजनीतिक दृष्टिकोण से ही नहीं, बल्कि मानवीय दृष्टिकोण से भी समझना होगा। विभाजन के दौरान लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़ना पड़ा और असंख्य परिवारों ने अपनों को खोया। इस पीड़ा को याद करना आने वाली पीढ़ियों को शांति, एकता और भाईचारे का संदेश देने का माध्यम बनना चाहिए।


राष्ट्रप्रेम से ही विकसित भारत का सपना होगा साकार:


खर्रा ने कहा कि आज देश के सामने 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य है। यदि नई पीढ़ी के मन में राष्ट्रप्रेम और देश के प्रति जिम्मेदारी की भावना होगी, तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के अनुरूप 2047 तक देश को विकसित राष्ट्र बनाने का सपना निश्चित रूप से पूरा होगा। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे स्वतंत्रता सेनानियों और विभाजन की पीड़ा झेलने वाले लोगों के संघर्ष से प्रेरणा लेकर देश की प्रगति में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आजादी का वास्तविक सम्मान तभी होगा, जब प्रत्येक नागरिक देश की एकता, अखंडता, सामाजिक समरसता और विकास में अपना योगदान दे।


‘यह दिवस लाखों लोगों के दर्द और त्याग को नमन करने का अवसर’


कार्यक्रम के मुख्य वक्ता एवं विचारक बजरंगलाल ने कहा कि विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस केवल इतिहास के एक अध्याय को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि उन लाखों लोगों के दर्द, संघर्ष और त्याग को नमन करने का अवसर है, जिन्होंने वर्ष 1947 में देश के विभाजन की त्रासदी को झेला। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों ने जिस पीड़ा और विस्थापन का सामना किया, उसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि समाज इतिहास से सीख लेकर भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए सजग रहे। उन्होंने कहा कि विभाजन की त्रासदी हमें मानवता, सामाजिक सद्भाव और राष्ट्रीय एकता का महत्व समझाती है।


कलेक्टर ने कहा—विभाजन से लें सबक, मानवता को रखें सबसे पहले जिला कलेक्टर डॉ. अरुण गर्ग ने कार्यक्रम में उपस्थित अतिथियों एवं आगंतुकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि विभाजन का इतिहास हमें बहुत कुछ सिखाता है। उन्होंने कहा कि इतिहास की त्रासदियों को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि उनसे सबक लेकर बेहतर और शांतिपूर्ण भविष्य का निर्माण करना होना चाहिए। उन्होंने आमजन एवं युवाओं से अपील की कि वे मानवता को सर्वोपरि रखते हुए आपसी भाईचारे, सद्भाव और सामाजिक समरसता को मजबूत करें। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही उसकी ताकत है और देश की एकता एवं अखंडता को मजबूत बनाए रखना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है।


वक्ताओं ने कहा—आजादी गौरव, विभाजन का दर्द कभी नहीं भुलाया जा सकता झुंझुनूं विधायक राजेंद्र भांबू, उदयपुरवाटी के पूर्व विधायक शुभकरण चौधरी, पूर्व सांसद संतोष अहलावत तथा निवर्तमान जिला प्रमुख हर्षिनी कुल्हरी ने भी संगोष्ठी को संबोधित किया। वक्ताओं ने कहा कि भारत की आजादी प्रत्येक देशवासी के लिए गौरव का विषय है, लेकिन इस आजादी के साथ देश के विभाजन का ऐसा दर्द भी जुड़ा हुआ है, जिसे शब्दों में पूरी तरह व्यक्त कर पाना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों ने अपार कष्ट सहे और अपना घर, जमीन-जायदाद तथा अपनी जड़ें तक छोड़नी पड़ीं। इस इतिहास को याद रखना इसलिए जरूरी है, ताकि आने वाली पीढ़ियां आजादी के मूल्य को समझ सकें और देश की एकता को मजबूत बनाने में योगदान दें।


प्रदर्शनी का अवलोकन: इससे पहले कार्यक्रम के नोडल अधिकारी एवं जिला जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु सिंह ने मंत्री झाबर सिंह खर्रा को ‘विभाजन की विभीषिका’ विषय पर लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन करवाते हुए संगोष्ठी के आयोजन के उद्देश्य की जानकारी दी। संगोष्ठी के आयोजन में स्काउट्स, नगर परिषद एवं अखिल भारतीय साहित्य परिषद का भी सहयोग रहा। इस दौरान पूर्व उप जिला प्रमुख बनवारीलाल सैनी, विशंभर पूनिया भी मंचस्थ रहे। कार्यक्रम का संचालन स्काउट सीओ महेश कालावत ने किया। इस अवसर पर लायंस क्लब एवं श्री श्याम आशीर्वाद सेवा संस्था के सहयोग से उपस्थित युवाओं एवं लोगों को अतिथियों द्वारा तिरंगा वितरण भी किया गया।