पार्षद के पिता की शिकायत पर कार्रवाई की मांग, विधायक बोले—निर्वाचित प्रतिनिधि की स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रहना जरूरी
भीम प्रज्ञा न्यूज़.बुहाना।
बुहाना नगर पालिका अध्यक्ष पद का चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, वैसे-वैसे सियासी घटनाक्रम भी नया मोड़ लेता जा रहा है। कांग्रेस के वार्ड संख्या 5 से निर्वाचित पार्षद सुनील कुमार सिहोड़िया के लापता होने और उनसे संपर्क नहीं होने को लेकर उनके पिता सुभाष चंद्र की ओर से पुलिस को परिवाद दिए जाने के बाद मामला अब राजनीतिक गलियारों से निकलकर पुलिस थाने तक पहुंच गया है। मामले को लेकर सूरजगढ़ विधायक श्रवण कुमार शनिवार को बुहाना थाने पहुंचे और थाना अधिकारी राम मनोहर से मुलाकात कर शिकायत पर कार्रवाई की मांग की।विधायक ने पुलिस के समक्ष पार्षद के परिजनों की चिंता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि परिवार की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत को गंभीरता से लिया जाए तथा पार्षद सुनील कुमार से संपर्क कर उनकी स्थिति और उनका पक्ष जाना जाए। पार्षद के पिता सुभाष चंद्र ने भी अपने पुत्र से संपर्क कराने और उससे मिलने की गुहार लगाई है।
कांग्रेस के सुधीर रांगेय, भाजपा की मंजू बाला आमने-सामने
बुहाना नगर पालिका के अध्यक्ष पद के चुनाव में कांग्रेस ने सुधीर रांगेय को अपना उम्मीदवार बनाया है, जबकि भाजपा की ओर से मंजू बाला प्रत्याशी हैं। इसी बीच कांग्रेस से निर्वाचित पार्षद सुनील कुमार ने दोनों दलों से अलग निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल कर चुनावी गणित को और उलझा दिया है। नामांकन के दौरान सुनील कुमार को भाजपा नेताओं के साथ देखे जाने के बाद राजनीतिक चर्चाओं का बाजार गर्म है। हालांकि उन्होंने अपना नामांकन भाजपा व निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में दाखिल किया था लेकिन भाजपा का टिकट नहीं मिलने से केवल वह निर्दलीय प्रत्याशी रह गए और उनके अंतिम समर्थन को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में फिलहाल उन्हें किसी दल का अधिकृत प्रत्याशी या समर्थित उम्मीदवार मानने के बजाय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ही देखा जाना अधिक उचित है।
20 पार्षदों के बीच एक-एक वोट की अहमियत
नगर पालिका में कुल 20 निर्वाचित पार्षद हैं और उपलब्ध राजनीतिक समीकरणों के अनुसार कांग्रेस तथा भाजपा के बीच मुकाबला बेहद करीबी माना जा रहा है। अन्य निर्दलीय पार्षदों के कांग्रेस खेमे में होने की चर्चा के बीच सुनील कुमार का अलग निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में सामने आना पूरे समीकरण को प्रभावित कर सकता है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यदि दोनों प्रमुख खेमों के पार्षद अपने-अपने प्रत्याशी के पक्ष में मतदान करते हैं और क्रॉस वोटिंग नहीं होती, तो मुकाबला बराबरी तक पहुंच सकता है। यदि सुनील कुमार घर वापसी करते हैं तो कांग्रेस का खेमा मजबूत हो सकता है ऐसी स्थिति में लागू चुनावी नियमों के अनुसार बराबरी की स्थिति में आगे की प्रक्रिया निर्णायक होगी। वहीं यदि सुनील कुमार अपने पक्ष में पर्याप्त पार्षदों का समर्थन जुटाने में सफल होते हैं तो मुकाबला त्रिकोणीय हो सकता है और मौजूदा समीकरण पूरी तरह बदल सकता है।
थाने पहुंचकर विधायक ने उठाया लोकतांत्रिक अधिकार का सवाल
पार्षद के पिता की शिकायत के बाद विधायक श्रवण कुमार ने प्रेस वार्ता कर पूरे घटनाक्रम को लेकर सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचित पार्षद की स्वतंत्रता पर किसी भी प्रकार का दबाव लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय है। विधायक ने कहा कि पार्षद एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि है और उसे अपने राजनीतिक निर्णय तथा मतदान के अधिकार का स्वतंत्र रूप से प्रयोग करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने परिवार की शिकायत पर पुलिस से निष्पक्ष कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि पहले पार्षद से संपर्क स्थापित किया जाए और उसका पक्ष सामने लाया जाए।विधायक ने राज्य की भाजपा सरकार की नीतियों पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि जिस प्रकार निर्वाचित प्रतिनिधियों को लेकर घटनाक्रम सामने आ रहे हैं, उससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं। ये विधायक के राजनीतिक आरोप हैं, जिन पर सरकार या भाजपा पक्ष की प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
कानून भी स्वतंत्र चुनावी अधिकार में हस्तक्षेप को गंभीरता से देखता है
राजस्थान नगरपालिका अधिनियम, 2009 में चुनाव के संदर्भ में अनुचित प्रभाव को भ्रष्ट आचरण के रूप में परिभाषित किया गया है। अधिनियम के अनुसार किसी उम्मीदवार या मतदाता के स्वतंत्र चुनावी अधिकार में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष हस्तक्षेप या हस्तक्षेप के प्रयास को अनुचित प्रभाव माना जा सकता है। इसी तरह मतदाता को मतदान के लिए प्रभावित करने के उद्देश्य से रिश्वत या प्रलोभन भी भ्रष्ट आचरण के दायरे में आता है। अधिनियम में मतदान के अधिकार और मतदान की प्रक्रिया से जुड़े प्रावधान भी हैं। हालांकि बुहाना के मौजूदा मामले में किसी प्रकार का दबाव, प्रलोभन या बंधक बनाए जाने का आरोप अभी आरोप के स्तर पर ही है। इसकी पुष्टि पुलिस की जांच अथवा सक्षम प्राधिकारी की कार्रवाई के बाद ही हो सकेगी।
मुकेश रांगेय की चर्चा भी बरकरार
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के वार्ड संख्या 3 से निर्वाचित पार्षद मुकेश रांगेय को लेकर भी कस्बे में राजनीतिक चर्चा जारी है। चुनाव से पहले उन्हें अध्यक्ष पद के प्रमुख दावेदारों में माना जा रहा था, लेकिन बदले समीकरण में कांग्रेस ने सुधीर रांगेय को प्रत्याशी बनाया।मुकेश रांगेय की ओर से इस घटनाक्रम में संयम बरतने और पार्टी के साथ बने रहने को लेकर समर्थकों तथा आमजन के बीच कुछ लोगों का मानना है कि राजनीतिक महत्वाकांक्षा स्वाभाविक है, लेकिन अवसर नहीं मिलने के बाद भी धैर्य और संगठन के साथ खड़े रहना भी राजनीतिक परिपक्वता का संकेत हो सकता है।
अब सवाल सिर्फ चेयरमैन का नहीं, पार्षद की स्वतंत्रता का भी
बुहाना में अध्यक्ष पद की कुर्सी के लिए चल रही राजनीतिक खींचतान अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां एक पार्षद का वोट पूरे चुनाव का गणित बदल सकता है और एक पार्षद की स्वतंत्रता को लेकर उठे सवाल पूरे चुनाव की निष्पक्षता पर बहस खड़ी कर सकते हैं। कांग्रेस के सुधीर रांगेय, भाजपा की मंजू बाला और निर्दलीय सुनील कुमार के बीच मुकाबले ने चुनाव को रोचक बना दिया है। दूसरी ओर सुनील कुमार के पिता की शिकायत और विधायक श्रवण कुमार का थाने पहुंचना और प्रेस कांफ्रेंस के जरिए दिए गए बयान से मामले को और गंभीर बना रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है—सुनील कुमार कहां हैं, उनकी वास्तविक स्थिति क्या है और अध्यक्ष पद के चुनाव में उनका स्वतंत्र राजनीतिक निर्णय क्या होगा? इन सवालों का जवाब पुलिस की कार्रवाई, पार्षद के स्वयं सामने आने और मतदान के दिन उनके वास्तविक रुख से ही मिलेगा। फिलहाल बुहाना की सियासत में हर नजर एक-एक पार्षद पर और हर चर्चा अध्यक्ष की कुर्सी के बदलते गणित पर टिकी हुई है।


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