भीम प्रज्ञा न्यूज.बुहाना। आगामी निकाय चुनावों को लेकर बुहाना नगर पालिका में वार्डों का आरक्षण तय कर दिया गया है। आरक्षण सूची सामने आने के बाद नगर पालिका क्षेत्र में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। संभावित प्रत्याशियों ने अपने-अपने वार्डों में जनसंपर्क बढ़ाना शुरू कर दिया है। वहीं नगर पालिका चेयरमैन पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित होने से चुनावी समीकरण और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। बुहाना नगर पालिका में कुल 20 वार्ड हैं। आरक्षण विवरण के अनुसार इनमें एससी वर्ग के 4, ओबीसी वर्ग के 4 और सामान्य वर्ग के 12 वार्ड शामिल हैं। वार्डों के साथ अध्यक्ष पद का आरक्षण भी सामने आने के बाद अब स्थानीय राजनीति में एससी वर्ग के संभावित दावेदारों की सक्रियता बढ़ने की संभावना है।
*एससी वर्ग के लिए 4 वार्ड*
अनुसूचित जाति वर्ग के लिए कुल चार वार्ड निर्धारित किए गए हैं। इनमें वार्ड नंबर 3, 5 और 8 एससी सामान्य तथा वार्ड नंबर 6 एससी महिला के लिए निर्धारित है। इसके साथ ही नगर पालिका अध्यक्ष पद एससी वर्ग के लिए आरक्षित होने से एससी वर्ग के संभावित अध्यक्ष पद के दावेदारों के बीच भी राजनीतिक गतिविधियां तेज होने की संभावना है। अध्यक्ष पद के लिए वार्ड स्तर पर चुनाव जीतकर आने वाले संभावित दावेदारों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
*ओबीसी वर्ग में 4 वार्ड*
ओबीसी वर्ग के लिए कुल चार वार्ड निर्धारित किए गए हैं। इनमें वार्ड नंबर 1, 10 और 13 ओबीसी सामान्य तथा वार्ड नंबर 9 ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है। इन वार्डों में भी संभावित प्रत्याशियों ने चुनावी तैयारियों को लेकर सक्रियता बढ़ानी शुरू कर दी है। आरक्षण के बाद अब दावेदार अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के आधार पर रणनीति तैयार करने में जुटेंगे।
*सामान्य वर्ग के 12 वार्ड*
नगर पालिका के कुल 20 वार्डों में से 12 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित किए गए हैं। इनमें वार्ड नंबर 11, 12, 15 और 16 सामान्य महिला के लिए हैं। वहीं वार्ड नंबर 2, 4, 7, 14, 17, 18, 19 और 20 सामान्य ओपन वार्ड रखे गए हैं। इन वार्डों में सामान्य वर्ग के संभावित प्रत्याशियों के बीच चुनावी मुकाबले की तस्वीर आने वाले दिनों में और स्पष्ट होने की संभावना है।
*चेयरमैन पद एससी आरक्षित होने से बदले राजनीतिक समीकरण*
नगर पालिका चेयरमैन पद के एससी वर्ग के लिए आरक्षित होने से बुहाना की स्थानीय राजनीति में इसका सीधा असर देखने को मिल सकता है। अब राजनीतिक दलों और संभावित प्रत्याशियों की नजर उन वार्डों पर भी रहेगी, जहां से अध्यक्ष पद के संभावित दावेदार चुनाव मैदान में उतर सकते हैं। आरक्षण तय होने के बाद कई संभावित प्रत्याशियों के लिए चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। वहीं कुछ दावेदारों को आरक्षण के अनुसार अपनी रणनीति बदलनी पड़ सकती है। स्थानीय स्तर पर सामाजिक समीकरण, जनाधार और वार्डवार मतदाता स्थिति को लेकर भी चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।


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