भीम प्रज्ञा न्यूज़ | झुंझुनूं।
नगर निकाय चुनाव की सरगर्मी के बीच शहर की स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को लेकर वार्ड नंबर 38 से प्रत्याशी शहबाज फारुकी ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे अपने प्रमुख चुनावी मुद्दों में शामिल किया है। फारुकी का कहना है कि जब शहरवासियों से करोड़ों रुपये का शहरी कर वसूला जा रहा है, तो फिर उन्हीं नागरिकों को अपनी गली में एक स्ट्रीट लाइट लगवाने अथवा खराब लाइट ठीक करवाने के लिए कार्यालयों के चक्कर क्यों लगाने पड़ें।
“टैक्स जनता दे और अंधेरा भी जनता सहे—यह व्यवस्था कब बदलेगी?”
शहबाज फारुकी ने कहा कि नगर परिषद द्वारा बिजली बिलों के माध्यम से शहर की जनता से 8 करोड़ 62 लाख 2 हजार रुपये शहरी कर के रूप में वसूले जाने की बात सामने आती है। इसके बावजूद शहर के अनेक हिस्सों में पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था नहीं होना गंभीर चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि करदाता नागरिक को मूलभूत सुविधा के लिए किसी अधिकारी या कर्मचारी के सामने बार-बार अपनी समस्या बतानी पड़े, हाथ जोड़ने पड़ें या लाइन में लगना पड़े, तो यह केवल स्ट्रीट लाइट की समस्या नहीं, बल्कि जवाबदेही और व्यवस्था का सवाल है।
अंधेरी गलियां सुरक्षा के लिए भी चुनौती
फारुकी ने कहा कि स्ट्रीट लाइट केवल रात में रोशनी का साधन नहीं है, बल्कि यह शहर की सुरक्षा और सुगम आवागमन से सीधे जुड़ी सुविधा है। अंधेरी गलियों और रास्तों के कारण महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों को असुविधा के साथ सुरक्षा संबंधी चिंताओं का सामना करना पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक वार्ड में यह सुनिश्चित होना चाहिए कि मुख्य मार्गों के साथ-साथ गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर भी पर्याप्त रोशनी हो तथा खराब पड़ी लाइटों की मरम्मत के लिए प्रभावी व्यवस्था मौजूद रहे।
“लाइट लगाने से ज्यादा जरूरी है स्थायी व्यवस्था”
शहबाज फारुकी ने कहा कि उनका जोर केवल नई स्ट्रीट लाइट लगवाने पर नहीं, बल्कि स्थायी प्रकाश व्यवस्था विकसित कराने पर रहेगा। वार्ड 38 की प्रत्येक गली और मुख्य रास्ते का सर्वे करवाकर अंधेरे स्थानों, खराब लाइटों और नई लाइट की आवश्यकता वाले स्थानों को चिन्हित करवाने की बात उन्होंने कही।
उन्होंने कहा कि समस्याओं की सूची तैयार होने के बाद प्राथमिकता के आधार पर उनके समाधान के लिए नगर परिषद में प्रभावी ढंग से आवाज उठाई जाएगी। साथ ही खराब लाइटों की मरम्मत के लिए समयबद्ध व्यवस्था बनाने की मांग भी रखी जाएगी।
कर वसूली के साथ सुविधाओं की जवाबदेही भी जरूरी
फारुकी ने कहा कि नगर परिषद को मिलने वाला राजस्व शहर के विकास और नागरिक सुविधाओं पर दिखाई देना चाहिए। जनता से कर लेना प्रशासनिक व्यवस्था का एक हिस्सा है, लेकिन उसके बदले नागरिकों को सड़क, सफाई, जल निकासी, प्रकाश व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना भी स्थानीय निकाय की जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि चुनाव केवल प्रतिनिधि चुनने का अवसर नहीं, बल्कि शहर की प्राथमिकताओं और जवाबदेही तय करने का भी समय है। जनता को यह देखना चाहिए कि कौन व्यक्ति समस्याओं को केवल चुनावी मुद्दा बनाता है और कौन उनके स्थायी समाधान के लिए आवाज उठाने का संकल्प रखता है।
“जनता मालिक, प्रतिनिधि सेवक”
शहबाज फारुकी ने कहा कि उनका प्रयास रहेगा कि वार्ड 38 के नागरिकों को छोटी-छोटी मूलभूत सुविधाओं के लिए बार-बार नगर परिषद के चक्कर न लगाने पड़ें। उन्होंने कहा कि चुना हुआ प्रतिनिधि जनता का सेवक और उसकी आवाज होता है।
उन्होंने कहा कि वार्ड 38 में स्ट्रीट लाइट व्यवस्था को दुरुस्त कराना, अंधेरे स्थानों को चिन्हित करवाना, खराब लाइटों की समयबद्ध मरम्मत और आवश्यक स्थानों पर नई रोशनी की व्यवस्था उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगी।
फारुकी ने कहा कि जनता के पैसे से शहर का विकास होना चाहिए और नागरिकों को अपनी ही सुविधा के लिए परेशानी उठाने की स्थिति समाप्त होनी चाहिए। उनका कहना है कि अब सवाल केवल एक लाइट का नहीं, बल्कि जनता के पैसे के बदले जनता को मिलने वाली सुविधा और जवाबदेही का है।
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करोड़ों का शहरी कर, फिर भी गलियों में अंधेरा!
वार्ड 38 से प्रत्याशी शहबाज फारुकी ने स्ट्रीट लाइट व्यवस्था पर उठाए सवाल, बोले—“जनता को लाइट के लिए लाइन में नहीं, व्यवस्था के लिए नगर परिषद चाहिए”



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