भीम प्रज्ञा न्यूज़.चिड़ावा। भगवान के नाम का उच्चारण मन के समस्त पापों को समाप्त करने मे सक्षम है। मनुष्य ज़ब मुख से भगवान के नाम का उच्चारण करता है तब परमात्मा उसके हृदय मे आकर बैठ जाते है तथा जो मनुष्य के मन में कलुशितता होती है उसको साफ कर देते है। उक्त कथन शहर की डालमिया की ढाणी स्थित श्रीरामशरणम् बालाजी मंदिर में पितृ पक्ष के पवित्र अवसर पर चल रहीं श्रीमद् भागवत कथा के तीसरे दिन वाणी भूषण पंडित प्रभुशरण तिवाड़ी ने अजामिल प्रसंग मे कहे। तिवाड़ी ने समस्त स्रोताओ से अधिकाधिक भगवान के नाम के उच्चारण की आदत डालने का आह्वान किया। कथा मे स्वर्ग नर्क का वर्णन प्रहलाद कथा समुद्र मंथन तथा भगवान वामन प्रसंग का विस्तार से वर्णन किया गया। कथा से पूर्व यजमान कृष्ण सिंह तँवर ने सपत्नीक पंडित गोपाल शर्मा के द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य भागवत व व्यास पूजन किया। कथा के दौरान रंगकर्मी सुरेश शेखावत के द्वारा सजाई गई मनोहारी भगवान वामन की सजीव झांकी तथा राजू भगत व लाल राणा के द्वारा सुन्दर भजनों की प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय बन गया। इस दौरान पार्षद प्रतिनिधि बिहारी लाल सैनी, रवि शर्मा, महेन्द्र सैनी मनोज शर्मा,मंगतूराम सैनी,रामनिवास जांगीड, राजेन्द्र कुमार,शंकर लाल सैनी, विद्याधर स्वामी,रघुवीर सिंह तंवर मखन लाल वर्मा,सज्जन कुमार सैनी,राजू सिंह तंवर,सुभाष सैनी, सोनू सिंह,विष्णु जांगीड, सूरज तंवर, सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु महिला- पुरुष मौजूद रहे।
चिड़ावा
भगवत भक्ति का सबसे श्रेष्ठ साधन भगवान का नामोच्चरण
डालमिया की ढाणी में श्रीमद् भागवत कथा में सजाई भगवान वामन की झांकी



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