चिड़ावा, 11 अक्टूबर 2026
शारदीय नवरात्रि के इस पावन और पवित्र अवसर पर शेखावाटी अंचल में भक्ति, आस्था और सांस्कृतिक कला का एक बेहद अनूठा और मनमोहक संगम देखने को मिल रहा है। इस बार चिड़ावा में श्री शिव हनुमान मित्र मंडल के तत्वावधान में आयोजित हो रहे पंचम श्री दुर्गा महोत्सव के दौरान बंगाल की प्रसिद्ध पारंपरिक दुर्गा पूजा शैली की झलक ने पूरे क्षेत्र को अध्यात्म और कला के रंग में रंग दिया है। इस आयोजन का मुख्य आकर्षण बंगाल की तर्ज पर कटराथल में तैयार की गई मां महिषासुर मर्दिनी की करीब 12.15 फीट ऊंची अत्यंत भव्य और अलौकिक प्रतिमा है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।


शेखावाटी की पारंपरिक संस्कृति में आमतौर पर मां दुर्गा के शेरावाली स्वरूप की प्रतिमाएं स्थापित करने की परंपरा रही है, लेकिन इस बार बंगाल की प्राचीन और विशिष्ट दुर्गा पूजा परंपरा को जीवंत करते हुए मां महिषासुर मर्दिनी का यह विशेष स्वरूप तैयार किया गया है। यह विशाल प्रतिमा करीब 17 फीट चौड़े पाटे पर विराजमान की गई है। इस कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें मां दुर्गा के साथ-साथ भगवान गणेश, धन की देवी मां लक्ष्मी, विद्या की देवी मां सरस्वती और भगवान कार्तिकेय की मनमोहक प्रतिमाएं भी एक साथ सुसज्जित हैं। बंगाल के पंडालों की तर्ज पर शेखावाटी में पहली बार इस प्रकार की वृहद और कलात्मक प्रतिमा का निर्माण किया गया है, जो अपनी अद्भुत बनावट और भव्यता के कारण हर आने जाने वाले भक्त के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनी हुई है।
इस अनूठी प्रतिमा के निर्माण के पीछे कुशल मूर्तिकार लोकेश पंडित की महीनों की मेहनत और बारीक कलाकारी छिपी है। मूर्तिकार ने जानकारी देते हुए बताया कि इस भव्य स्वरूप को तैयार करने में लगभग एक महीने का समय लगा है। इसे पूरी तरह से टिकाऊ और पारंपरिक रूप देने के लिए प्लाई और पवित्र गंगा की मिट्टी का उपयोग किया गया है। शेखावाटी की माटी पर बंगाल की लोक कला और धार्मिक परंपरा का यह सुंदर समन्वय स्थानीय कला प्रेमियों और श्रद्धालुओं के लिए बेहद नया और प्रेरणादायक अनुभव है।
इस धार्मिक और सांस्कृतिक अनुष्ठान के तहत चिड़ावा में पंचम श्री दुर्गा महोत्सव और श्रीकृष्ण कथा का शुभारंभ रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को एक भव्य और विशाल कलश यात्रा के साथ हो चुका है। आयोजन के पहले दिन सुबह 11:15 बजे शहर के ऐतिहासिक गांधी चौक स्थित केवलदास जी मंदिर से कलश यात्रा का विधिवत आरंभ हुआ। इस पवित्र यात्रा में मुख्य यजमान के रूप में मधुबाला चंपा लाल जांगिड़ ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। माथे पर कलश धारण किए सुसज्जित महिलाओं और डीजे की भक्ति धुनों के साथ यह यात्रा मुख्य बाजार और कबूतर खाना क्षेत्र से होते हुए अपने निर्धारित कथा स्थल तक पहुंची। मार्ग में जगह-जगह पुष्प वर्षा कर कलश यात्रा का भव्य स्वागत किया गया, जिससे पूरे शहर का वातावरण पूरी तरह से भक्तिमय हो गया।
नवरात्रि के इन पावन दिनों में आयोजित हो रहे इस धार्मिक महोत्सव के तहत आगामी 11 से 19 अक्टूबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 5:15 बजे से अमृतमयी श्रीकृष्ण कथा का रसास्वादन कराया जाएगा। इस कथा का वाचन करने के लिए विशेष रूप से वृंदावन धाम से प्रख्यात कथा व्यास देवी चित्रा मंजरी जी पधार रही हैं, जो अपने श्रीमुख से भक्तों को भगवान श्रीकृष्ण की अलौकिक लीलाओं और उनके जीवन दर्शन से परिचित कराएंगी। आयोजकों का मानना है कि इस महोत्सव के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक ही प्रांगण में शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की आराधना के साथ-साथ श्रीकृष्ण के संदेशों को सुनने का सौभाग्य प्राप्त होगा।
इस भव्य कलश यात्रा और महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर मंडल के सभी कार्यकर्ताओं और शहर के गणमान्य नागरिकों ने बढ़-चढ़कर अपनी भागीदारी निभाई। इस दौरान ग्यारसी लाल सैनी, बाबूलाल सैनी, विनोद सैनी, राजेश कटारिया, राकेश शर्मा, विकास शर्मा, विक्रम सैनी, कृष्ण गोपाल शर्मा, रवि कटारिया, मोनू वर्मा, नितेश वर्मा, राजेंद्र कुमावत, लोकेश कटारिया, आर्यन सैनी, अंकित वर्मा, तरुण शर्मा, हर्ष शर्मा, किशन शर्मा, सोनू शर्मा, प्रियांशु सैनी, पीयूष सैनी, आकाश वर्मा, जतिन कटारिया, साहिल सैनी और मोनू समेत बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालु और श्री शिव हनुमान मित्र मंडल के समस्त सदस्य उपस्थित रहे। आयोजकों ने क्षेत्र के सभी धर्मप्रेमियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर मां दुर्गा और श्रीकृष्ण का आशीर्वाद लेने की अपील की है।

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